अलविदा मनमोहन सिंह, आप बहुत याद आएंगे: डॉ बीपी त्यागी
कहा जाता है कि भविष्य को समझना है तो इतिहास पढ़िए. कहा ये भी जाता है कि भविष्य का निर्धारण करने में इतिहास एक शिक्षक होता है. इतिहास से ही अपने मूल्यांकन की बात अर्थशास्त्र के शिक्षक से आरबीआई गवर्नर, फिर वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने पर 9 साल 359 दिन दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनमोहन सिंह ने की थी. जीवन को खुली किताब बताने वाले देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इतिहास कैसे याद करेगा? क्योंकि 92 वर्ष की आयु में अंतिम सांस लेने वाले मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के आरोप से लेकर मजबूत प्रधानमंत्री होने तक की शंकाओं को लेकर उठते सवालों पर सिर्फ एक जवाब दिया, फैसला इतिहास करेगा. इतिहास से खुद के प्रति उदार होने की ईमानदार उम्मीद लगाते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इतिहास कैसे याद करेगा. क्या इतिहास पूर्व पीएम को केवल अर्थशास्त्र के उस मेहनती विद्यार्थी के तौर पर याद करेगा, जिन्होंने किताबें-डिग्रियां केवल पढाई या कमाई के लिए नहीं उठाई, बल्कि इतिहास को उदार होकर याद करना होगा योजना आयोग के उपाध्यक्ष से लेकर RBI के गवर्नर और फिर 1991 में...