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Showing posts from January, 2022

क्या चंद्रशेखर रावण अखिलेश यादव को नुकसान दे पाएंगे

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अजय शर्मा  वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक   चंद्रशेखर अब आजाद होकर चुनाव मैदान में उतरने जा रहे हैं। वे अखिलेश यादव को धोखेबाज कह रहे हैं। महत्वपूर्ण सवाल है कि बगैर कुछ किए ही अखिलेश यादव धोखेबाज कैसे हो गये? चंद्रशेखर आजाद यह भी कह रहे हैं कि अखिलेश यादव को दलितों को साथ लेकर चलना ही नहीं है। वे ऐसा चाहते ही नहीं हैं। यह वही भाषा है जो अखिलेश के लिए भाजपा बोलना चाहती है। सवाल यह है कि क्या अखिलेश भाजपा के बुने जाल में फंस गये हैं? या फिर अखिलेश यादव ने भाजपा को ही अपने जाल में फंसा लिया है।  धोखा किसने किसको दिया? भाजपा दरबार से लिखी गई है पूरी पटकथा धोखा किसने किसको दिया? चंद्रशेखर ने अखिलेश को या फिर अखिलेश ने चंद्रशेखर को? अखिलेश यादव भोले निकले। वास्तव में दलितों के हितों की रक्षा के मोह में ही उन्होंने चंद्रशेखर को तवज्जो दी। मगर, चंद्रशेखर को आजाद ही रहना था। उन्हें अखिलेश यादव के साथ जुड़ना ही नहीं था। यह पूरी पटकथा भाजपा दरबार से लिखी गई है और उस पर चंद्रशेखर ने अमल किया है। आपको याद दिला दूं कि दलित वोटों पर पकड़ मजबूत बनाने के लिए चंद्रशेख...

चुनाव और कोरोना की मोहब्बत में सियासतदार

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अजय शर्मा वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक  कोरोना भी सियासतदारों को चुनाव की मोहब्बत से अलग नहीं कर सका। यह ऐसी मोहब्बत है जिसमें सियासतदार जुदाई बरदाश्त नहीं कर सकते। ऐसा इश्क अभी तक आपने दो प्यार करने वाले आश्किों में देखा था जो किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। जो इस मोहब्बत में कोई भी कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं। उनके लिए सबकुछ यह मोहब्ब्त होती है। चाहे अपनी जान क्यों ना देनी पड़े। इस वक्त आपको प्यार, इश्क, मोहब्ब्त के जुनून पर लिखे गए गीत, कविताए, शेर याद आ रहे होगे। कैसे आशिक अपने प्यार के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं उन्हें किसी की कोई परवाह नहीं होती। किसी की जान भी लेने से नहीं हिचकते। इतिहास भी ऐसे कुछ बडे बड़े युद्धों का गवाह है जो सिर्फ मोहब्बत में लड़े गए। जिसमें खून बहा, चिंताएं चलीं, लाशें नदियों में बहीं। लाशों को आवारा पशुओं और चील गिद्धों ने नोच नोच कर खाया। लेकिन मोहब्बत का जूनून कभी कम नहीं पड़ा।  ऐसी ही मोहब्बत चुनाव को लेकर देखने के लिए मिल रही है जिसमें कोरोना का कोई डर नहीं है। चाहे कोरोना कितनी भी जिदंगियां क्यों ना छीन ले। चाह...