एसबीएन ग्रुप और महाराणा प्रताप सेना वीर शिरोमणि, अवकेनिंग इंडिया फाउंडेशन की राहें अलग, कौन जिम्मेदार?
रेबीज मुक्त गाजियाबाद अभियान अकेले ही संचालित करेगी अवकेनिंग इंडिया फाउंडेशन डॉ बी पी त्यागी के नेतृत्व में
महानगर अध्यक्ष तरुण रावत के गैर जिम्मेदार व्यवहार ने रेबीज़ मुक्त गाजियाबाद अभियान को मजाक का पात्र बनाया
गाजियाबाद में स्ट्रीट डॉग के हमले की खबरें सुर्खियां बटोरती आई है इन कुत्तों का आतंक इतना ज्यादा था गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने भी इस मुद्दे को सदन में उठाया।
आपको याद होगा आज से लगभग 2 महीने पहले महाराणा प्रताप सेना मैं गाजियाबाद के प्रतिष्ठित डॉक्टर बीपी त्यागी की फाउंडेशन अवकेनिंग इंडिया के साथ मिलकर रेबीज मुक्त गाजियाबाद अभियान की शुरुआत की थी इसको लेकर एक बहुत ही शानदार प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया था। गाजियाबाद में इस अभियान की जिम्मेदारी महानगर अध्यक्ष तरुण रावत पर थी आपकी जानकारी के लिए बता दें तरुण रावत कांग्रेस पार्टी की पूर्व में प्रत्याशी और एसबीएन ग्रुप की डायरेक्टर पुष्पा रावत के बेटे हैं।
तरुण रावत भी एसबीएन एजुकेशनल ग्रुप के डायरेक्टर है। तरुण रावत गाजियाबाद की शहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं।
जानकारी के मुताबिक रेबीज मुक्त गाजियाबाद अभियान से डॉक्टर बीपी त्यागी के अलग होने की वजह महाराणा प्रताप सेवा का इस अभियान में गंभीरता न दिखाना और इसको सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने का हथकंडा समझा गया। क्योंकि तरुण रावत कांग्रेस पार्टी से शहर विधानसभा से चुनाव लड़ना चाहते थे वहीं दूसरी तरफ पार्टी के सदस्य सत्यम अग्रवाल लोक जनशक्ति पार्टी के जिला अध्यक्ष बन गए।
तरुण रावत के साथ दो बीपी त्यागी का सामंजस्य नहीं बैठ पाता दिखाई दे रहा था क्योंकि तरुण रावत के गैर जिम्मेदार व्यवहार के कारण बहुत सारे मुद्दे बनने शुरू हो गए थे।
तरुण रावत ने अवकेनिंग इंडिया फाउंडेशन से आने वाले फोन कॉल्स को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था और वह हमेशा अपने आप को अन्य गतिविधियों में व्यस्त बताते थे।
यह तल्खियां उस वक्त और बढ़ गई जब कोलकाता डॉक्टर रेप और मर्डर केस को लेकर गाजियाबाद के शास्त्री नगर में एक कैंडल मार्च का आयोजन किया गया जिसमें डॉक्टर बीपी त्यागी यानी कि अवकेनिंग इंडिया फाउंडेशन को बुलाया गया लेकिन वहां पर महाराणा प्रताप सेना की तरफ से सत्यम अग्रवाल जिला अध्यक्ष लोक जनशक्ति पार्टी ने इस कैंडल मार्च का राजनीतिक कारण कर दिया जिससे दुखी होकर डॉक्टर बीपी त्यागी ने रेबीज मुक्त गाजियाबाद अभियान को अवकेनिंग इंडिया फाउंडेशन की तरफ से ही संचालित करने का फैसला किया और महाराणा प्रताप सेना तथा एसबीएन एजुकेशनल ग्रुप से अपने आप को अलग कर लिया।
इस गैर जिम्मेदारी ने बहुत सारे सवालों को जन्म दिया है कुछ लोगों का यहां तक कहना है महाराणा प्रताप सेना और तरुण रावत ने डॉ बी पी त्यागी का उपयोग अपनी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए किया।
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