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समाज को खोखला कर रहा है सोशल मीडिया

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सोशल मीडिया ने दुनियाभर के समाज में एक खोखलापन पैदा किया है. हम जो नहीं हैं, वो हम दूसरों को दिखाना और महसूस कराना चाहते हैं. लेकिन क्यों? इसके कई सारे जवाब हो सकते हैं लेकिन इंटरनेट ने मानव सभ्यता को पहली दफ़ा वास्तविक दुनिया से काटकर आभासी दुनिया के प्रति सम्मोहित कर दिया है. और ये सिलसिला रुकने वाला नहीं. अब तो मेटावर्स की आमद है, जो आभासी दुनिया को चार कदम आगे ले जाने वाला है.  इन सबका मानवों की सोच और उनके व्यवहार पर अभूतपूर्व असर पड़ रहा है. आभासी दुनिया के सम्बंध अब वास्तविक दुनिया को प्रभावित करने लगे हैं, जो नहीं होना चाहिए था. ये ज़रूरी नहीं है कि आभासी दुनिया का हमारा व्यवहार, वास्तविक दुनिया से मेल खाता हो. आभासी दुनिया में हमारी प्रतिक्रिया त्वरित होती है जबकि वास्तविक दुनिया में हम अमूमन सोचकर कोई कदम उठाते हैं. अगर किसी से राग-द्वेष है भी तो उसके सशरीर सामने आने पर हमारा व्यवहार बदल जाता है, जो आभासी दुनिया में नहीं होता.  सोशल मीडिया की भी एक साइकॉलॉजी यानी मनोविज्ञान होता है और मैं इसी रूप में इसका अध्ययन करता रहता हूँ. अमूमन बनावटी दिख रहे लोगों क...