अतुल गर्ग की जीत और डोली शर्मा का अहंकार
अजय शर्मा
भारतीय जनता पार्टी के गढ़ गाजियाबाद से अतुल गर्ग का जीत कर आना किसी को भी हैरान कर देने वाला नहीं है लोगों को पहले से पता था अतुल गर्ग जीतेंगे लेकिन कम वोटो से जीतेंगे।
अतुल गर्ग को अपनी जीत पक्की तब लगने लगी जब उन्होंने डोली शर्मा को चुनाव लड़ते हुए देखा डॉली शर्मा के आसपास के रणनीतिकारों ने डोली शर्मा को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
गाजियाबाद की राजनीति में जितने भी राजनीतिक रणनीतिकार है वह सभी हमेशा विपक्ष के लोगों को हराने के लिए ही काम करते हैं क्योंकि इनके पास ना इतनी योग्यता है और ना ही क्षमता है यह लोग अंधों में काना राजा के समान है।
डॉली शर्मा को लगा कि कि वह अपने पिता के अनुभव और कुछ लोगों की मूर्खता पूर्ण रणनीति के आधार पर इस चुनाव को जीत लेगी।
गाजियाबाद एक तरह से डोली शर्मा के अंदर अपने नए सांसद को देख रहा था तलाश रहा था लेकिन डोली शर्मा का विवेकहीन व्यवहार, गलत लोगों का चुनाव, डॉली शर्मा को इस चुनावी रण क्षेत्र से बाहर ले गया कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया की डोली शर्मा चुनाव लड़ने के लिए नहीं आई है बल्कि वह अपनी पॉलिटिकल ब्रांडिंग कर रही है इसके अलावा उनका टारगेट कुछ और है कुछ लोगों ने यहां तक कह दिया की डोली शर्मा ने कांग्रेस पार्टी से चुनाव के लिए मिले हुए फंड को अपने निजी इस्तेमाल मैं इस्तेमाल कर लिया।
डॉली शर्मा की हर में एक सबसे बड़ा कारण और रहा वह था वीरेंद्र यादव की संगठन पर कमजोर पकड़।
वीरेंद्र यादव ने जिस तरह की अपनी टीम खड़ी की वह चुनाव को जिताने में सक्षम नहीं थी क्योंकि उनका खुद ही जन आधार नहीं है।
ऋतु खन्ना समाजवादी पार्टी की चुनावी सहयोगी के रूप में थी।
अतुल गर्ग के इस चुनाव जीतने में वीरेंद्र यादव और ऋतु खन्ना का सबसे बड़ा हाथ माना जा सकता है इन दोनों की टीम ने अतुल गर्ग को जिताने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।
इंडिया गठबंधन यहां पर जन आक्रोश को वोट में परिवर्तित नहीं कर पाया।
फिलहाल तो अतुल गर्ग को जीत की शुभकामनाएं दी जा सकती हैं लेकिन उनकी जीत जनरल वीके सिंह की विरासत के सामने बहुत छोटी है।
अतुल गर्ग की जीत तब हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके लिए चुनाव प्रचार किया।
मेरा मानना है डॉली शर्मा अच्छी प्रवक्ता हो सकती है लेकिन चुनावी राजनीति के लिए वह एकदम से आरोग्य है उन्हें चुनावी राजनीति से दूर रहना चाहिए बल्कि पार्टी को उनके ऊपर इस तरह का जोखिम नहीं लेना चाहिए।
वह कांग्रेस पार्टी की प्रवक्ता के रूप में सेवा करें उनके लिए इतना ही काफी है।
रही बात अतुल गर्ग की तो अतुल गर्ग अब कैसे सांसद साबित होंगे यह आने वाले 6 महीने में पता चल जाएगा।
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