गाजियाबाद की प्यास बुझा रहा है दूषित पानी, ज़िम्मेदार कौन ?
गाजियाबाद की प्यास बुझा रहा है दूषित पानी
ज़िम्मे दार कौन ?
डॉ बीपी त्यागी (हेल्थ प्रभारी रास्ट्र वादी नव निर्माण दल)
गाजियाबाद के निवासी दूषित पानी पीने के लिए मजबूर है यहां का पानी दूषित और जहरीला है। भूगर्भ जल से संबंधित जितनी भी एजेंसियां हैं वे अपनी रिपोर्ट जारी कर चुकी है जिसमें यह कहा गया है कि यहां का पानी का स्तर नीचे जा चुका है और गाजियाबाद जिले को डेंजर जोन में रखा गया है।
आपको याद होगा कुछ साल पहले हिंडन नदी की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए और जल निगम ने भी पंपिंग सेट से लेकर घरों में पानी की सप्लाई को लेकर भी काफी अच्छा पैसा खर्च किया।
लेकिन गाजियाबाद के निवासियों को पीने का स्वच्छ पानी नहीं मिला अगर कुछ मिला तो वह बोतल बंद पानी मिला और उसमें भी मिलावट है गाजियाबाद में आरो के प्लाट और पानी की बोतल की सप्लाई करने वालों का एक मकड़जाल फैला हुआ है।
मैं आपको बताना चाहता हूं अभी कुछ दिन पहले मैंने अपनी डॉक्टरों की टीम के साथ गाजियाबाद की कैला भट्टा क्षेत्र में एक हेल्थ कैंप लगाया था और वहां पर पानी के सैंपल लिए थे।
केला भट्टा क्षेत्र में पानी की गुणवत्ता अपने सबसे निचले स्तर पर मिली जिसकी वजह से वहां के लोगों में काफी सारी बीमारियां हैं जिन्हें आप पानी जनित बीमारी कह सकते हैं।
अब जिस तरह की सूचनाओं मिल रही है वह काफी डरने वाली है गाजियाबाद की कुछ कॉलोनीयों को तो अति संवेदनशील घोषित किया गया है जिसमें विजयनगर प्रताप विहार लोनी ट्रॉनिका सिटी जैसे क्षेत्र है यहां का पानी पीने वाले लोग एक तरह से जहर पी रहे हैं।
गाजियाबाद में लगभग 30000 से ज्यादा छोटे-बड़े औद्योगिक इकाइयां है इसके अलावा यहां पर रियल स्टेट के कंस्ट्रक्शन का भी व्यापार बड़े स्तर पर होता है जिसने गाजियाबाद को बूंद बूंद पानी के लिए तरसा दिया है अब यह गाजियाबाद को तय करना है कि वह बूंद बूंद पानी के लिए प्यासा रहे या फिर जहरीला पानी पीकर धीरे-धीरे मरता जाए।
यह प्यास इतनी बड़ी है की गाजियाबाद जहरीला और दूषित पानी पीने के लिए मजबूर है। पानी बेचने वाली कंपनियां कि यहां पर करोड़ों रुपए की कमाई है।
पानी का शोधन करने के नाम पर आने वाला करोड़ों रुपए का फंड नेताओं की जेब में है।
मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूं की 2019 में पानी की जांच के लिए एक एडवांस लैब बनाई गई थी जो कि बंद पड़ी है और पानी के सैंपल लखनऊ भेजे जाते हैं।
अब आप इसी से अंदाजा लगा ले की आपको कैसे जिंदा रहना है पानी पीकर मरना है या बिना पानी पिए मरना है।
और यदि हम मरीजों की बात करें तो प्रतिदिन लगभग 50 मैरिज गाजियाबाद में डायरिया के आ रही है यह संख्या आने वाले जून में और बढ़ेगी। जून के लास्ट तक बरसात का मौसम आ जाएगा और पानी की समस्या और पानी से होने वाली बीमारियों की सूची लंबी हो जाएगी।
ऐसे में मैं गाजियाबाद से पूछता हूं कि ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों और नेताओं का क्या करना चाहिए जो आपकी जिंदगी से खेल रहे हैं।
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