उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 24000 मरीजों की जिंदगी खतरे में, रेबीज सीरम की उपलब्धता ! सवालिया निशान लगाया है डॉक्टर बी पी त्यागी ने

उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की फटकार के बाद भी एंटी रेबीज सीरम न होने से 24000 मरिजो की ज़िंदगी से हर रोज़ हो रहा है खिलवाड़


रास्ट्रवादी जनसत्ता दल के चिकित्सा प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ बी पी एस त्यागी बताते है कि एक ज़िले में क़रीब ३०० मरिजो को प्रति दिन रेबीज के इंजेक्शन लग रहे है तो 80 ज़िलो के हिसाब से यह संख्या 24000 ( चोबीस हज़ार ) हो जाती है ।

रेबीज कंट्रोल करने की नेशनल व WHO गाइड लाईनस कहती है कि अगर बंदर /डॉग व अन्य रेबीज फैलाने वाले जानवर के काटने पर अगर एक बूँद खून भी निकलता है तो उस घाव में एंटी रेबीज सीरम के साथ साथ एंटी रेबीज वैक्सीन सब डरमल व मांस पेशी में  लगना बहुत आवश्यक है । सीरम घाव के नीचे व वैक्सीन डेल्टॉयड रीजन में इंट्रा डरमल (ब्लेब बनने तक ) व इंट्रामुस्कुलर रूट से 0,3,7,14,28 दिन में लगना चाहिए । अन्यथा रेबीज का इन्फेक्शन हो सकता है जो की 100% जान लेवा बीमारी है । 
पालतू डॉग व अन्य रैबिड एनिमल जो की वैक्सीनेटेड होते है , उनके काटने पर 0, 3 दिन में वैक्सीन व सीरम दोनों लगना ही चाहिये । ग़ाज़ियाबाद में पिछले तीन साल में लग भग 3,28,500 मरीज़ बिना एंटी रेबीज सीरम के ट्रीटमेंट ले चुके है भविष्य में इन मरिजो का क्या होगा श्री राम ही जाने ??.


यह हमारे प्रदेश के हेल्थ सिस्टम पर बहुत बड़ा सवालिया निशान उठाता है ।

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