गाजियाबाद की इंदिरापुरम कॉलोनी भगवान भरोसे

यदि एमसीडी की तरह ही गाजियाबाद नगर निगम का लाइव टेलीकास्ट हो रहा होता तो लोगों ने क्या देखा होता

इंदिरापुरम कॉलोनी जीडीए की जिम्मेदारी या फिर नगर निगम की जिम्मेदारी

अजय शर्मा प्रधान संपादक
राजनीतिक अखाड़ा

सुलगते सवाल
इंदिरापुरम कॉलोनी ने उठाई कुछ प्रश्न यदि इंदिरापुरम कॉलोनी जीडीए की जिम्मेदारी है तो फिर वहां से चुने गए पार्षदों का क्या औचित्य है। 
क्या इंदिरापुरम के वार्ड नंबर 100 का कोई महत्व रह जाता है जब यह कॉलोनी नगर निगम के अंदर नहीं आती है. 

गाजियाबाद नगर निगम की बैठक हंगामा, तीखी बहस, चीखना चिल्लाना और एक दूसरे को धक्का मुक्की के नाम रही। पार्षद ऐसे व्यवहार कर रहे थे जैसे कि वह किसी आदिम युग में हो। जहां पर एक ही बात होती थी जिसकी लाठी उसकी भैंस। कोई किसी की बात सुनने के लिए तैयार नहीं था सभी पार्षदों को लगता था सिर्फ वही सही है। 

पार्षदों का गुस्सा और उनकी चढ़ी हुई त्यौरियां बता रही थी की पार्षद अपने अलावा किसी की सुनने के लिए तैयार नहीं है। ये वही जनप्रतिनिधि है जिन्हें गाजियाबाद की बहुत ही शिक्षित और सभ्य जनता ने वोट के अधिकार के जरिए सदन तक पहुंचाया है यह उनकी समस्याओं का समाधान निकालेंगे और शहर को बहुत ही खूबसूरत बना कर रखेंगे। 

लेकिन इन्होंने लोकतंत्र की खूबसूरती को ही बदसूरत बना दिया और उस वोट का अपमान किया। वोट की धज्जियां उड़ा दी जिसकी वजह से ये यहां खड़े थे। जिस लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन्हें पार्षद बनाया इन अधिकार दिए और लोकतंत्र की खूबसूरती है जिसने पक्ष और विपक्ष बहुत ही शांत रहते हुए तर्कों के साथ बहस करते हैं और एक अच्छा फैसला करते हैं जिससे कि लोगों का जीवन खुशहाल हो सुखद  हो। 
यह तो शुक्र है दिल्ली एमसीडी की तरह गाजियाबाद नगर निगम का लाइव टेलीकास्ट नहीं होता है नहीं तो पूरी दुनिया के सामने गाजियाबाद नगर निगम शर्मसार हो जाता और सभी को पता चलता कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि कितने परिपक्व है। 

यदि आपके चुने हुए प्रतिनिधि में परिपक्वता नहीं है सूझबूझ नहीं है और वह लोकतांत्रिक व्यवस्था की गंभीरता को नहीं समझ सकता है तो उसे जन्म प्रतिनिधि बने रहने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए मैं मानता हूं कि लोगों को अपने वोट का अधिकार का इस्तेमाल सोच समझकर और विवेक पूर्ण करना चाहिए। राजनीति का स्टार हर रोज गिरता जा रहा है हमें ऐसे ऐसे दृश्य देखने के लिए मिल रहे हैं जो हमें चौका दे रहे हैं चिंतित कर रहे हैं। 

 थोड़ा एक नजर डालते हैं इंदिरापुरम के हैंडोवर को लेकर क्या बहस हुई और क्या-क्या हुआ

 नए सदन की मंगलवार को पहली बोर्ड बैठक की शुरूआत में ही इंदिरापुरम कॉलोनी हैंडओवर को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। इंदिरापुरम स्थित वार्ड-100 के पार्षद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि इंदिरापुरम को नगर निगम के हैंडओवर न कर वहां रह रही 4.50 लाख की जनता के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। पार्षद वहां पर विकास कार्य नहीं करा पा रहे हैं। जबकि 300 से अधिक अवैध कालोनियों में नगर निगम लगातार विकास कार्य करा रहा है। 1200 एकड़ में इंदिरापुरम कॉलोनी है। संजय सिंह ने कहा कि इंदिरापुरम के हम सभी पार्षद भिक्षा मांगते हैं कि इंदिरापुरम को नगर निगम के हैंडओवर किया जाए। हैंडओवर को लेकर टेक्निकल पहलू और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का बातों को उठाते हुए नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष राजीव शर्मा ने विरोध जताया। 

राजीव शर्मा ने कहा, जीडीए ने इंदिरापुरम को बसाया है। वहां पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की जिम्मेदारी जीडीए की है। बिना रुपए लिए हैंडओवर की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाए। काफी देर तक दोनों पक्षों में हंगामा होता रहा और दोनों पक्ष एक दूसरे के काफी नजदीक आ गये। 

म्युनिसिपल कमिश्नर विक्रमादित्य मलिक ने दोनों पक्षों से शांति की अपील की। इंदिरापुरम के अन्य पार्षदों ने विरोध जताया और उन पर हैंडओवर की प्रक्रिया में अड़ंगा डालने का आरोप लगाया।

 इसके बाद हंगामा तेज हो गया। करीब 15 मिनट तक दोनों पक्ष के बीच जमकर बहस हुई।

 मेयर सुनीता दयाल ने कहा कि हैंडओवर की प्रक्रिया को नियम के तहत आगे बढ़ाया जाएगा, वहां पर जीडीए को विकास कार्य कराने होंगे।

 हालांकि, अब नगर निगम द्वारा पार्षदों को विकास कार्य के लिए जो कोटा दिया जाएगा, उस कोटे 30-30 लाख रुपए के इंदिरापुरम के पांच पार्षदों को कार्य के लिए दिया जाएगा। जिससे वहां पर वह विकास कार्य करा सकेंगे। पार्षद प्रवीण चौधरी ने कहा कि इंदिरापुरम में जरूरी कार्य होने चाहिए। पार्षद आदिल मलिक ने सभी वार्डों में समान कार्य की मांग की गई।

तो यह है नगर निगम में हंगामा की वजह
 इंदिरापुरम कॉलोनी की जिम्मेदारी किस की नगर निगम या फिर जीडीए की । 
जो भी हो लेकिन इतना जरूर है इंदिरापुरम कॉलोनी भगवान भरोसे है उसके सभी विकास कार्य और रखरखाव भगवान भरोसे है। 
इंदिरापुरम कॉलोनी से एक सवाल उठता है यदि यह कॉलोनी जीडीए के अंतर्गत आता है जीडीए की जिम्मेदारी है तो फिर वहां से पार्षद कैसे चुन लिए गए। फिर तो वहां से पार्षद का चुनाव नहीं होना चाहिए था और जो पार्षद चुने गए हैं उन्हें तत्काल प्रभाव से निरस्त कर देना चाहिए जब तक यह फैसला ना हो जाए कि इंदिरापुरम कॉलोनी किसकी जिम्मेदारी है। 

फैसला आपको करना है कौन है जिम्मेदार और आपकी वोट का क्या हुआ जब आपकी कॉलोनी ही भगवान भरोसे है

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