समाज को खोखला कर रहा है सोशल मीडिया
सोशल मीडिया ने दुनियाभर के समाज में एक खोखलापन पैदा किया है. हम जो नहीं हैं, वो हम दूसरों को दिखाना और महसूस कराना चाहते हैं. लेकिन क्यों? इसके कई सारे जवाब हो सकते हैं लेकिन इंटरनेट ने मानव सभ्यता को पहली दफ़ा वास्तविक दुनिया से काटकर आभासी दुनिया के प्रति सम्मोहित कर दिया है. और ये सिलसिला रुकने वाला नहीं. अब तो मेटावर्स की आमद है, जो आभासी दुनिया को चार कदम आगे ले जाने वाला है.
इन सबका मानवों की सोच और उनके व्यवहार पर अभूतपूर्व असर पड़ रहा है. आभासी दुनिया के सम्बंध अब वास्तविक दुनिया को प्रभावित करने लगे हैं, जो नहीं होना चाहिए था. ये ज़रूरी नहीं है कि आभासी दुनिया का हमारा व्यवहार, वास्तविक दुनिया से मेल खाता हो. आभासी दुनिया में हमारी प्रतिक्रिया त्वरित होती है जबकि वास्तविक दुनिया में हम अमूमन सोचकर कोई कदम उठाते हैं. अगर किसी से राग-द्वेष है भी तो उसके सशरीर सामने आने पर हमारा व्यवहार बदल जाता है, जो आभासी दुनिया में नहीं होता.
सोशल मीडिया की भी एक साइकॉलॉजी यानी मनोविज्ञान होता है और मैं इसी रूप में इसका अध्ययन करता रहता हूँ. अमूमन बनावटी दिख रहे लोगों को अमित्र करता रहता हूँ और वैसे लोगों को जो इसका इस्तेमाल वैमनस्य फैलाने के लिए करते हैं. कुछ लोग भावावेश में बहुत कुछ ऐसा लिख जाते हैं, जो उन्हें नहीं लिखना-बोलना चाहिए. वास्तविक दुनिया में आप उनसे मिलेंगे तो उनका व्यवहार अलग होगा लेकिन सोशल मीडिया पर वे अलग नज़र आते हैं. इसके भी कई कारण हैं, जिनके विस्तार में अभी नहीं जाना चाहता. एक और चीज है- पद की मर्यादा. तीन आयाम वाली हमारी वास्तविक दुनिया में तो कई लोग अपने पदानुरूप आचरण और मनन करते हैं पर सोशल मीडिया पर वे बेलगाम हो जाते हैं. अपने एक टार्गेट आडिएंस को 'खुश' करने के चक्कर में वे समाज और पद के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी भूल जाते हैं. ये भी दुखद है. ऐसा नहीं होना चाहिए.
आभासी दुनिया यानी सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए ज़रूर करिए लेकिन इसे असली दुनिया मानकर यहाँ सबकुछ मत उड़ेलिए. बहुत कुछ है, जो आपका निजी है. आपकी 'तथाकथित' कामयाबी हर दिन दुनिया जाने, ये ज़रूरी नहीं. हमारे और आप से पहले भी इस दुनिया में बहुत से तोपची आए. उस वक़्त सोशल मीडिया नहीं था, फिर भी इतिहास में आज वे दर्ज हैं. हम और आप कौन सा तोप चला रहे हैं, जो मानव इतिहास में दर्ज हो जाएगा, ये सोच लीजिएगा तो तत्काल ज़मीन पर आ जाइएगा. अभी एक अत्यंत शक्तिशाली टेलिस्कोप ने अंतरिक्ष की एक तस्वीर भेजी है, जो अरबों साल पहले वहाँ से निकले प्रकाश का प्रतिबिम्ब बनाता है. उसे देखकर समझ आता है कि अरबों-खरबों तारों व ग्रहों को समेटे हमारी मिल्की-वे गैलेक्जी इस अनंत ब्रह्मांड में एक बिंदु के बराबर भी नहीं. फिर इस मिल्की-वे गैलेक्जी के एक बिंदु के भी औक़ात नहीं रखने वाले हमारे सौरमंडल और उसमें स्थित हमारी पृथ्वी की क्या बिसात! विज्ञान की मानें तो हमारी पृथ्वी कई कारणों से अचानक ही नष्ट हो सकती है और उसकी कोई भविष्यवाणी भी नहीं हो पाएगी. सब कुछ प्रॉबेबिलिटी का खेल है. ठीक वैसे ही, जैसे डायनासोर ख़त्म हो गए.
अचानक.
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