आजम खां का राजनीतिक भविष्य क्या
उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद से रामपुर से सपा विधायक आजम खान को लेकर नई नई चर्चाएँ हने लगी है ....सीतापुर की जेल में सपा विधायक आजम खां करीब २७ महीने के बाद जेल से बहार आयें ...आजम खान ने आपातकाल में 19 माह की जेल में सजा कटी थी....जब आजम खान जेल से बहार आ चुके हैं तो सवाल उठ रहा है की कहीं आजम खान किसी नए राजनीतिक विकल्प की तो नहीं सोच रहे हैं....आपको बता दें की इस्लामिक संगठनों के बीच जाकर मुसलमानों के मुद्दों पर चर्चा की बात कह कर उन्होंने अपने प्लान को जरूर सामने रख दिया है....
सपा पार्टी के कद्दावर नेता माने जाने वाले आजम खान लंबे समय बाद जेल से रिहा हो गए हैं और जेल से रामपुर लौटते ही आजम खान ने फिर से अपने अंदाज में विरोधियों को निशाने पर ले रहे हैं .....अखिलेश यादव से नाराजगी और सियासी भविष्य को लेकर सवाल करने पर किसी तरह कोई जवाब सीधे तौर पर देने से एंकर कर दिया.....वहीँ खुद को नेता विपक्ष का बड़ा बड़ा नेता बता कर अपना कद बताने की कोशिश जरुर की.... इस्लामिक संगठनों के बीच जाने की बात कहकर आजम खान के आगे के राजनीतिक भविष को लेकर ये जरूर बता दिया.....आजम खान इन दिनों सपा प्रमुख अखिलेश यादव से नाराज बताए जा रहे हैं..... नाराजगी की वजह बताया जा रहा अखिलेश यादव के आजम के जेल में रहते हुए न मिलने की वजह .....आजम खान ने शिवपाल यादव से लेकर कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम से तो मुलाकात की लेकिन समाजवादी पार्टीके विधायक से वह नहीं मिले.... ऐसे में आजम खान अगर सपा छोड़ने का फैसला करते हैं तो उनके सामने क्या राजनीतिक विकल्प होंगे.... उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में इन दिनों सपा विधायक आजम खान हैं जो सीतापुर जेल में 26 महीने से बंद है सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम खान की जब से नाराजगी की बात सामने आई है.... दूसरे दलों के नेताओं का जेल में उनसे मिल रहे थे ..... आजम खान शिवपाल यादव से लेकर कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम से तो मुलाकात की लेकिन सपा विधायक रविदास मल्होत्रा को बिना मिले ही वापस कर दिया .....ऐसे में सवाल यही उठ रहा की आजम खान अब अखिलेश यादव से अलग सियासी राह तलाश रहे हैं....अगर ऐसा ही है तो आखिर अगला क्या विकल्प है ....
रामपुर में पिछले कई सैलून से आजम परिवार का दबदबा बना रहा है अकेले आजम खान यहां से 10 बार विधायक चुने गए हैं तो एक बार रामपुर से चुनाव जीतकर लोकसभा का भी सफर तय चुके हैं....बताया जा रहा है की समाजवादी पार्टी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा.... आजम खान के बेटे अब्दुल्लाह आजम के एक ट्वीट के बाद सियासत फिर से गरमा गई है...सवाल उठ रहे हैं कि क्या आजम खान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से नाराज चल रहे हैं.....आजम खान जेल से रिहाई के बाद भी समाजवादी पार्टी से नाराज हैं क्या ?दोनों नेताओं के बीच की दुरी को लेकर यूपी की सियासत में चर्चा बना हुआ है ....वैसे तो वक्त वक्त पर अखिलेश यादव और खुद आजम खान ऐसे तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए नजर आए हैं लेकिन इन सबके बीच मंगलवार को आजम खान के तरफ से किए गए बेटे अब्दुल्लाह आजम के tweet ने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है....
मंगलवार को अब्दुल्लाह आजम ने पिता के हवाले से ट्वीट कर लिखा कि मैं अभी जिंदा हूं तो जिंदा हूं आजम खान साहब जी अब्दुल हसन के ट्वीट किए गए फोटो के नीचे हरे रंग के शब्दों में लिखा है जावेद पठान आजम वादी संवादी शब्द अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है सवाल यह है कि क्या अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी को भविष्य की राजनीति में रामपुर से सबसे बड़ी चुनौती आतंकवादी देने वाले हैं अगर ऐसा हुआ तो अखिलेश के लिए इस क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती आजम वादी यानी आजम खान से टकराना होगा क्योंकि रामपुर में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के लिए सबसे मजबूत स्तंभ आजम खान है
रामपुर में आजम परिवार का दबदबा
रामपुर के राजनीतिक इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि यहां पिछले कई सालों से आजम परिवार का दबदबा रहा है अकेले आजम खान यहां से 10 बार विधायक चुने गए हैं तो एक बार रामपुर से चुनाव जीतकर लोकसभा का भी सफर तय कर चुके हैं आजम खान की पत्नी तंजीम फातिमा ने साल 2019 में आजम के लोकसभा पहुंचने के बाद खाली हुई रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में जीत दर्ज की थी कि आजम खान का ही जलवा था जो तंजीम फातिमा ने 2014 में राज्यसभा का सफर तय किया था
आजमवादी गुट सपा के लिए बन सकती है चुनौती
रामपुर जिले के स्वार विधानसभा सीट पर आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने लगातार दो बार यानी 2017 और 2022 में जीत दर्ज की कुल मिलाकर रामपुर में हुए 14 चुनाव में आजम खान या उनके परिवार का दबदबा रहा जबकि दो बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ जयाप्रदा लोकसभा पहुंची थी उसके पीछे भी आजम खान की राजनीतिक ताकत और उनका समर्थन ही था ऐसे में समाजवादी पार्टी से आजम वादी गुड अलग होता है तो इसे अखिलेश यादव के लिए रामपुर लोकसभा सीट पर होने वाले लोकसभा उपचुनाव और भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जाएगा
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