पंजाबी खत्रियों का चेहरा सपा नेत्री रितु खन्ना की चुनावी दंगल में एंट्री
अजय शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस, बसपा और सपा अपने पुराने कर्मठ पूर्व पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सम्मान के साथ मनाकर प्रदेश की सक्रिय राजनीति में उतार रही है। उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी ने अभी महिला छात्र सभा की टीम की घोषणा की है वहीं महिला प्रदेश अध्यक्ष लीलावती कुशवाह पूरे प्रदेश के तुफानी दौरे पर है। अभी कुछ दिन पहले वह गाजियाबाद में थी जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में जन विश्वास रथ यात्रा के दौरान गाजियाबाद में थे।
ठीक इसी दिन सपा प्रदेश अध्यक्ष लीलावती कुशवाह ने गाजियाबाद की पूर्व महानगर अध्यक्ष रितु खन्ना को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी की घोषणा की। रितु खन्ना के नाम की घोषणा होते ही यूपी के राजनीतिक गलियारे में सक्रियता बढ़ गई। लीलावती कुशवाह ने यूपी की महिला प्रदेश अध्यक्ष गीता शाक्य की टीम की रणनीति को भेदने के लिए पंजाबी खत्री चेहरे को अपनी टीम में वरीयता दी है। गीता शाक्य ने अपनी टीम में वैश्य, ठाकुर और ब्राहम्ण समाज को प्रमुखता दी थी। वहीं सपा नेत्री लीलावती कुशवाह ने जाट, ब्राहम्ण, पंजाबी खत्री, पिछडे आदियों को प्रमुखता दी है। राजनीतिक विश्लेषको ंके मुताबिक वरिष्ठ सपा नेत्री रितु खन्ना की वजह से पंजाबी और खत्री वोट बैंक के अलावा संभ्रात वर्ग समाजवादी पार्टी से जुड़ेगा। इस वर्ग का व्यवसाय में अच्छी भागीदारी है। अभी पिछले महीने पंजाबी एकता महासभा ने भी राजनीति में अपने समाज का आहवान किया था। यहां तक कहा कि हमें मेयर और पार्षद के लिए उम्मीदवार मैदान में उतारने चाहिए। महासभा ने कहा कि हम सभी राजनीतिक पार्टियों से अपील करते हैं कि हमारे लोगों को भी राजनीति में अवसर दें। जबकि देश के विकास में हमारा भी योगदान है। लेकिन कुछ जातियों को ही विशेष मौके दिए जा रहे हैं।
यहां पर गौर करने वाली बात है कि गाजियाबाद में पंजाबी खत्री समाज के लगभग 2 से 3 लाख वोट हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में लगभग 10 प्रतिशत आबादी पंजाबी खत्री समाज की है। शहरी क्षेत्र की बात करें तो गाजियाबाद, लखनउ, मेरठ, सहारनपुर, मेरठ, वाराणसी, बरेली, आगरा, नोएडा आदि में 25 प्रतिशत के आसपास आबादी है। प्रदेश स्तर पर बीजेपी के पास सुरेश खन्ना, लाल जी टंडन हैं और वहीं सपा के पास पूर्व कैबिनेट मंत्री रविदास महरोत्रा हैं। अब पार्टी ने रितु खन्ना को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी देकर चुनावी राजनीति में बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा करने की कोशिश की है। रितु खन्ना सपा की स्टार प्रचारक हैं। प्रखर वक्ता हैं। वह पूर्व सपा सांसद अक्षय यादव के लिए फिरोजाबाद में चुनाव प्रचार कर चुकी हैं। जिसके लिए प्रोफेसर राम गोपाल यादव भी उनकी सराहना कर चुके हैं। इसलिए रितु खन्ना को मिली नई जिम्मेदारी बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में है जब पार्टी पूरा जोर चुनाव जीतने पर लगा रही है। इस बार के चुनाव परिणाम यूपी के साथ साथ केन्द्र की राजनीति की दिशा और दशा भी तय करेंगे। इसलिए रितु खन्ना की जिम्मेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनको गंभीरता से लेना होगा। यदि बीजेपी उनको हल्के में लेती है तो चुनाव परिणामों पर असर पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में भाजपा हिन्दुत्व और काशी अयोध्या मॉडल को लेकर आम जनता के बीच में है। वहीं दूसरी और सपा जातियों के गठजोड़ और महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनता के बीच में है। यदि सपा जातियों और महिलाओं को एकजुट करने में कामयाब रहती है तो हिन्दुत्व का कार्ड फेल हो सकता है। आधी आबादी के अपने मुददे हैं किचन से लेकर व्यापार और नौकरी तक। ऐसे में यह चुनाव हर लिहाज से बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आधी आबादी किसे चुनती है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला वोटरों की संख्या 6 करोड़ 74 लाख है। यूपी में महिला पुरूष वोटर 14.66 करोड़ हैं। प्रदेश में मतदान केन्द्रो की संख्या 1.63.494 है। ऐसे में यूपी की 403 विधान सभा में 45 प्रतिशत महिला वोटरों की भूमिका बहुत ही निर्णायक साबित होने वाली है।
अब रितु खन्ना को लेकर बीजेपी क्या रणनीति अपनाती है। यह उनके रणनीतिकार और महिला ब्रिगेड के आंकलन पर निर्भर करेगा लेकिन जो भी हो इस बार का चुनाव बहुत से दिग्गजों की अग्निपरीक्षा है तो बहुत से उलटफेर करने वाला भी होगा।
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