उत्तर प्रदेश चुनाव में आप पार्टी कहां है
अजय शर्मा
उत्तर प्रदेश के चुनाव में सियासी रंग अब चटख होता जा रहा है। सभी पार्टियां अपना रंग दिखाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। इस बार के चुनाव में आम आदमी पार्टी भी अपनी सियासी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही है। जिसके लिए 2 जनवरी को लखनउ में पार्टी अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल एक जनसभा का आयोजन करने जा रहे हैं।
इस चुनावी जनसभा को सफल बनाने के लिए सांसद और यूपी प्रभारी संजय सिंह अपने दिल्ली आवास पर बैठकें चल रही हैं। यूपी के सहप्रभारी विधायक सुरेंन्द्र चैधरी और वरिष्ठ नेता दिलीप पांडे छोटी छोटी संगोष्ठी के जरिए 2 जनवरी की तैयारी कर रहे हैं। एक औपचारिक मुलाकात में विधायक सुरेन्द्र चैधरी ने बताया कि सभी भावी प्रत्याशियों को चुनावी जनसभा को सफल बनाने का जिम्मा सौंपा गया है। गाजियाबाद जिला प्रभारी विवेक सिंह कहते हैं कि ऐसे बहुत से टास्क हैं जो भावी प्रत्याशियों या टिकट की दावेदारी करने वाले को दिए गए हैं जिससे वे अपनी योग्यता साबित कर सकें। यानि कि आम आदमी पार्टी के पास उत्तर प्रदेश में भीड़ जुटाना सबसे बड़ा टास्क है। यही टास्क पार्टी के कार्यकताओं और पदाधिकारियों की अग्नि परीक्षा है।
लेकिन ऐसे में एक ज्वलंत सवाल है जो इस प्रदेश से पूछ रहा है कि भीड़ तंत्र और जनसमर्थन में क्या अंतर है। क्या पार्टियां भीड़ के जरिए माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं। चुनाव तो जनसमर्थन से जीता जाता है ना कि भीड़तंत्र से।
यहां पर यह समझने की कोशिश करनी होगी कि भाजपा और सपा की मुख्य प्रतिद्वदिता में बसपा, कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी कहां खड़ी है। क्या उसके पास कोई सियासी जमीन है। या फिर वह सिर्फ अपनी उपस्थिति लगा रही है। और दिल्ली माॅडल के आधार पर कुछ प्रतिशत वोट हासिल करने की कोशिश करेगी। जिससे अगले विधान सभा चुनाव की नींव रखी जा सके।
अब सवाल यह है कि आम आदमी पार्टी किस पार्टी के वोट काटेगी। क्या वह बसपा और कांगे्रस को नुकसान पहुंचाएगी। दिल्ली के विधान सभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस का तो सफाया कर दिया और बीजेपी के किले में सेध लगा दी। इसलिए आज आम आदमी पंजाब में सबसे ज्यादा ताकतवर दावेदार है। उम्मीद जताई जा रही है कि वह पंजाब में सरकार बना सकती है। यूपी चुनाव में यदि आम आदमी पार्टी को रकेश टिकैत का समर्थन मिला तो पश्चिमी यूपी में उसका खाता खुल जाएगा। राजनीति अनिश्चिताओं का खेल है यह भी हो सकता है आप पार्टी बाद में सपा से गठबंधन कर ले और सरकार का हिस्सा बन जाए। कुल मिलाकर आप पार्टी कुछ भी खोने नहीं जा रही है। वह सिर्फ पाने की स्थिति में है। मुझे लगता है बसपा का एक बड़ा वोट बैंक आप की तरफ जा सकता है। बसपा के कुछ जमीनी कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी आप के नेताओं के चाय की चुस्कियां लेने की खबरें हैं।
यानि कि कुल मिलाकर आम आदमी पार्टी यूपी चुनाव में भीड़तंत्ऱ का सहारा लेकर अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने में जुटी हुई है। आप को इस चुनाव में किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होने वाला है। वह सिर्फ फायदे में जाती हुई दिख रही है्र। उसने चुनाव में अपना दिल्ली माॅडल उतार दिया है। चुनाव में बीजेपी का काशी माॅडल, अयोध्या माॅडल, आप पार्टी का दिल्ली माॅडल और सपा का अपना यूपी का विकास माॅडल है। अब जनता तय करेगी कि वह भाजपा और सपा में से किसे चुने। जो भी हो आप पार्टी के लिए इस चुनाव में अपने लिए सियासी जमीन बनाना एक कठिन चुनौती है।
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