यूपी चुनाव के रण में लाल टोपी



अजय शर्मा 
वरिष्ठ पत्रकार 


समाजवादी पार्टी ने यूपी विधान सभा चुनाव में नई जान डाल दी है। यह चुनाव अब एक तरफा है। पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रैलियों ने चुनावी रंग लाल कर दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब सीधे अखिलेश यादव पर हमलावर हो गए हैं। वे अब अपने भाषणों में लाल टोपी का जिक्र कर रहे हैं। इसका मतलब उन्हें अब हर जगह लाल टोपी वाले यानि कि समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता दिखाई देने लगे हैं जिसने उन्हें अंदर तक हिला दिया है। इसे उनका राजनीतिक डर भी कहा जा सकता है। वे और उनके रणनीतिकार कुछ अलग अलग मॉडल की रणनीति लेकर चुनावी यौद्धाओं को मैदान में उतार रहे हैं। जिससे अखिलेश यादव के जनसमर्थन के सैलाब को रोका जा सके या फिर जनसमर्थन को बिखेरा जा सके। यदि यह जनसमर्थन यूपी के अन्य हिस्सों में दिखाई दिया तो उत्तर प्रदेश की सत्ता समाजवादी पार्टी के हाथों में होगी। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी की रणनीति वोटों के ध्रुवीकरण की होगी। जिससे उसे यूपी की सत्ता में बने रहने का अवसर मिल सके। वह अपना हिन्दुत्व कार्ड चुनावी बिसात पर चलेगी जैसा की बंगाल चुनाव में देखा गया था। पंश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने राजनीतिक रणकौशल और साहस से अपनी सत्ता को बचाए रखा। बीजेपी ने नुकसान तो पहुंचाया लेकिन सत्ता से बेदखल नहीं कर सकी। वहीं बीजेपी ने बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के समय में अपराध को जंगलराज कहकर वोटों को तोड़ दिया था जबकि तेजस्वी यादव ने बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार के मुददे को चुनाव में उठाया और बदलाव का झण्डा लहराने की कोशिश की। लेकिन बिहार की जनता उस जंगलराज शब्द से डर गई और बीजेपी कामयाब हो गई। 

शुरू में उत्तर प्रदेश में भी भारतीय जनता पार्टी ने बिहार की रणनीति पर चुनावी रण सजाया था लेकिन समाजवादी पार्टी को मिल रहे अपार जनसमर्थन की वजह से हिदुत्व कार्ड चलना पड़ा। अब हमारे सामने काशी और अयोध्या मॉडल सामने हैं। बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुददे हिन्दुत्व कार्ड के सामने खडे हैं। लोकतांत्रिक चुनाव में जनता किस को चुनेगी यह उसके आवश्यकता पर निर्भर करता है। जो भी है यह चुनाव जितना राजनीतिक पाटियों का है उतना ही जनता का भी है। इस चुनाव के परिणाम इस प्रदेश के अलावा दिल्ली में प्रधानमंत्री की कुर्सी का भी भविष्य तय करेगा।

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