गरीबी दूर करने के लिए आर्थिक समानता !
यदि हिंदुस्तान से जाति व्यवस्था के नाम पर कुरीतियों को को दूर करना है तो अर्थव्यवस्था मैं क्रांतिकारी बदलाव करने होंगे जिससे कि लोगों के सामाजिक जीवन में बढ़ोतरी हो.
आधुनिक अर्थव्यवस्था के माध्यम से गरीबी को दूर करने के साथ, ये अलगाव (जाति के) अपने आप ही गायब हो जाएंगे.
मैं समझता हूं इसके लिए समाजवाद की विचारधारा को समझने की आवश्यकता है क्योंकि यह समाज में आर्थिक और सामाजिक समानता की बात को करता है.
लेकिन कुछ राजनीतिक पार्टियों ने लोगों को अपने अपने चश्मे पहनाकर जातियों के नाम पर बांट दिया है. आजादी के 75 साल बाद भी समाज में अभी भी असमानता बनी हुई है.
अजय शर्मा
सोशल एक्टिविस्ट, पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक
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