गरीब, किसान और मजदूरों के लिए संघर्ष करना होगा

इस वक्त प्रदेश और देश के जो हालात हैं वह सोचने पर मजबूर करते हैं मेरे मन और आत्मा में बहुत पीड़ा होती है और कभी कभी पूरी रात में सो नहीं पाता हूं यह सोच कर कि क्या हो रहा है गरीब, पिछड़े, मजदूर, और किसान उनके प्रति जो नांइसाफी हो रही है गरीबी-अमीरी की खाई बढ़ रही है। उसे पाटने का संकल्प लेने का वक्त है महंगाई अपने चरम पर है पेट्रोल डीजल से लेकर आटा दाल चावल सब जरूरत से ज्यादा महंगा हो चुका है. 

इन सभी मुद्दों पर सिर्फ कोरी राजनीति हो रही है लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग के बारे में गंभीरता से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. 
इस वक्त जो हालात है वह बताते हैं कि देश में समाजवाद की कितनी अनिवार्यता है यदि समाजवाद स्थापित नहीं किया गया तो हर आम आदमी इस गरीबी और असमानता में हंसकर खत्म हो जाएगा. लोगों के बीच समानता लाने के लिए समाजवाद को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है यह समाजवाद सिर्फ विचारों में ही ना हो बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखाई दे आइए के लिए पहल करें. 

अजय शर्मा
 पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक एवं मीडिया सलाहकार

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